| Jan 01, 1970 | Daily Report |
| RISING BHARAT | News Count (103027) | |
20751. चाय की दुकान छोड़ शुरू की एलोवेरा की खेती, अब 47 तरह के उत्पाद बनाते हैं राजस्थान के अजय
Contribution of SOCIETY to “Make in India” Self-employment (Atmanibhar)
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Agriculture(Organic Farming)
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- राजस्थान के हनुमानगढ़ जिला के परलीका गाँव में रहने वाले 31 वर्षीय अजय स्वामी पिछले 12 साल से एलोवेरा की खेती कर रहे हैं। खेती करने के साथ -साथ अजय इसकी प्रोसेसिंग भी करते हैं और खुद अपने उत्पाद तैयार करके बाज़ार में बेचते हैं। उनके उत्पाद ‘नैचुरल हेल्थ केयर’ के नाम से लगभग 20 अलग-अलग कंपनियों को जा रहे हैं।
- अपनी खेती और प्रोसेसिंग के काम से आज लाखों में कमाने वाले अजय ने कभी अपनी शुरूआत मात्र 10 रुपये दिन की कमाई से की थी। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया और विरासत में मिला जीवन का संघर्ष और केवल दो बीघा ज़मीन।
- उन्होंने सामान्य पानी की बोतल में एलोवेरा का जूस भरकर बेचना शुरू किया। एक से दो, दो से चार, चार से दस बोतलें तैयार हुईं और ऐसे करते-करते उनका यह प्रोसेसिंग का काम जम गया। उनके उत्पादों को एक-दो कंपनियाँ खरीदने भी लगीं। इसके बाद, उन्होंने अपनी चाय की दुकान बंद करके सिर्फ खेती और प्रोसेसिंग पर ध्यान दिया। अपनी खेती के सिलसिले में कृषि विज्ञान केंद्र भी जाने लगे। यहाँ से भी उन्हें और अलग-अलग उत्पाद जैसे साबुन, क्रीम बनाने के बारे में जानकारी मिली।
20752. किसानों ने अभिशाप को बनाया वरदान, अब सफेद रेत पर हरा सोना उगाकर हो रहे मालामाल, तस्वीरें
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- पहले उपजाऊ भूमि में रेत भर जाने से किसान खेती से मुंह मोड़ने लगे थे, लेकिन किसान अब नई तकनीक से खेती करने लगे हैं। जिससे सफेद रेत में हरी सब्जियों व रेत पर उगने वाली फसल से वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। कछार की मिट्टी में न तो अधिक खाद की जरूरत होती है न ही सिंचाई की। बाढ़ के इस अभिशाप को कछार के किसानों ने अपने लिए वरदान बना लिया है।
- दो माह पूर्व जहां 15 से 20 फीट तक बाढ़ का पानी भरा था जिसमें किसानों की हजारों बीघा धान, गन्ना आदि फसल बर्बाद हो गई थी, आज उन्हीं सफेद रेत वाला खेतों को हरा सोने की खदान में बदलने के लिए संसाधन जुटाने और संवारने में किसान अपना पसीना बहा रहे है। यहां नवंबर माह से खेती का काम शुरु होकर मई माह में खत्म हो जाता है।
- नदी के रेत में बड़े स्तर पर तरबूज व खरबूजा की फसल लगाई जाती है फसल तैयार होने पर कई जिले के व्यापारी ट्रक द्वारा ले जाते हैं। दो जिलों की सीमा पर बसा गांव गुनौली निवासी पांचवी जमात तक पढ़े कालीप्रसाद व सीताराम कहते हैं कि खरबूजे की खेती ने उनके बैंक के खाते को भी वजनी कर दिया है, कहते हैं कि हसरत से हौसला है और हौसले से ही उड़ान होती है।
20753. दिल्ली से मां को केक की रेसिपी भेजती, मां जम्मू में केक बनाकर रिश्तेदारों को गिफ्ट करतीं; इसी बेकरी से 50 हजार रु महीना कमाई
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- दिल्ली में मोटी तनख्वाह वाली नौकरी करती थीं तान्या, जनवरी में खुद का बिजनेस करने लौट आईं, अपने घर के किचन को ही वर्कशॉप में बदला
- लॉकडाउन में फेसबुक-इंस्टाग्राम पर पेज बनाकर बेकरी आइटम्स को प्रमोट करना शुरू किया, ऑनलाइन और फोन पर ऑर्डर आने लगे
- तान्या के 'द बेकिंग वर्ल्ड ' पर अब केक के अलावा पेस्ट्री, कप केक, ब्राउनी, कुकीज जैसे बेकरी आइटम्स भी ऑर्डर पर तैयार किए जाते हैं। तान्या के पिता एक बिजनेसमैन और मां हाउसवाइफ हैं। मां केक मेकिंग में उन्हें सपोर्ट करती हैं, हालांकि रेसिपी तान्या की होती है।
20754. After Son Misses Desserts, Mumbai Parents Launch Amazing 100% Vegan Ice Creams
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- Samir and Hemali from Mumbai turned vegans two decades ago and raised their children as vegans. Here’s how they found alternatives to everything, including ice cream
- The decision to turn vegan was not easy for Mumbai-based Samir Pasad, the founder of Vegan Bites and Nomou, and his father. As vegetarians, their diet was heavily dairy dependent and since they made the decision to go vegan virtually overnight, twenty years ago, it meant their food choices became extremely limited. Vegans are people who refrain from consuming meat, eggs, dairy products, and any other animal-derived substances.
- Their initial guinea pigs were their own children and relatives who gave genuine feedback to help them develop a vegan ice cream closest to a conventional one. They also got reviews from customers who were offered ice creams along with their catered meals.
20755. महाराष्ट्र: पपीता-तरबूज की खेती कर लाखों कमाता है यह किसान, 50 अन्य को किया प्रेरित
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- महाराष्ट्र के बीड जिले के पराली तालुका के नंदगौल गाँव के संदीप गिते ने सूखाग्रस्त क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियों खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
- संदीप बताते हैं कि जैविक विधि से खेती करने में परम्परागत शैलियों के मुकाबले काफी कम पानी की जरूरत होती है और खर्च में भी कम होता है।
- संदीप फिलहाल, 20 टन पपीते की खेती करते हैं और उनके उत्पादों की आपूर्ति राज्य के कई हिस्सों में की जाती है।
20756. Kerala Man’s New Jackfruit Flour Helps Control Diabetes, Bags National Award
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- Jackfruit is now clinically proven to reduce blood sugar levels and help reverse diabetes. According to a study published by the American Diabetes Association, it brings down glycosylated haemoglobin (HbA1c), fasting blood glucose (FBG), and postprandial glucose (PPG).
- The conclusion of the study is based on a randomized, double-blind design where 20 of the 40 participants with type 2 diabetes (T2DM) were given 30 grams of green flour made from jackfruit for three months. The rest used regular wheat or rice flour to make rotis or idlis.
- At the end of the study, that was approved by the Indian Council of Medical Research (ICMR), it was found that people who mixed flour in their idli batter or wheat dough showed improvement in their plasma glucose levels.
20757. केरल के पूर्व इंजीनियर ने लॉकडाउन में शुरू कर दी गेंदे की खेती, हर महीने कमा रहे हैं 35 हजार रुपये
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- केरल के अरनमुला के रहने वाले 72 वर्षीय एन.के. कृष्णन नायर अपने खेतों से हर दिन लगभग 15-20 किलो गेंदे का फूल तोड़ते हैं। इन फूलों को बेचकर वह हर महीने करीब 35,000 रुपए कमा लेते हैं।
- बेंगलुरु के पास होसुर के अपने दोस्तों से संपर्क कर कृष्णन नायर ने उनसे गेंदे के लगभग 1,000 पौधे लिए। उन्होंने उनसे खेती के बारे में सलाह और जानकारी भी इकट्ठा की।
- कृष्णन नायर के खेत से हर दिन लगभग 15-20 किलोग्राम गेंदे के फूल निकलने लगे। इन्हें वह बाजारों में बेचकर हर महीने लगभग 35,000 रुपये की कमाई करने लगे। पिछले कुछ महीनों में कोझेनचेरी, पठानमथिट्टा के फूल विक्रेता हर दिन उनके खेत से फूल खरीदते हैं।
20758. यूरोप की यात्रा ने बदला मन तो दिल्ली की ग्लैमरस लाइफ छोड़ गाँव में शुरू कर दी सेब की खेती
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- गोपाल इन दिनों अपने आठ एकड़ के बगीचे से लाखों की कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा पाँच एकड़ में उन्होंने हल्दी और अदरक उगाया है। इसके साथ ही 7.1 फीट ऊंचा धनिया उगाकर उन्होंने गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज करवाया है। गोपाल को उत्तराखंड सरकार ने उद्यान पंडित और देवभूमि पुरस्कार से भी सम्मानित किया है।
- गोपाल अब हल्दी का प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे हैं। वह अपने खेत में उगाई गई हल्दी को खुद प्रोसेस करके बेचना चाहते हैं। वह दावा करते हैं कि उनका सेब का बगीचा उत्तराखंड का पहला आर्गेनिक सर्टिफाइड बगीचा है।
- वह किसानों को पौध और बीज वितरण भी करते हैं। साथ ही उन्हें बागवानी से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी मुहैया कराते हैं। उनका मकसद उत्तराखंड में प्रगतिशील और प्रशिक्षित किसानों को तैयार करना और आगे बढ़ाना है।
20759. लोगों को सही खाना मिले इसलिए लंदन की नौकरी छोड़ खेती शुरू की, खेती सिखाने के लिए बच्चों का स्कूल भी खोला, 60 लाख टर्नओवर
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Self -Reliance
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- नेहा 16 एकड़ जमीन पर खेती कर रहीं है, इसमें नोएडा में तीन एकड़ पर सब्जियां, मुजफ्फरनगर में 12 एकड़ में फल, भीमताल में एक एकड़ पर ऑर्गेनिक हर्ब की फार्मिंग करतीं है
- वे अपने प्रोडक्ट ऑनलाइन भी बेचती हैं, हर महीने करीब 500 ऑर्डर आते हैं, जो किसान अपने उत्पाद मार्केट तक नहीं ले जा पाते, उनके प्रोडक्ट भी नेहा ऑनलाइन बेचती हैं
- नेहा बताती हैं, 'दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद मैं एक सोशल ऑर्गनाइजेशन से जुड़ गई। मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा सहित कई राज्यों में एजुकेशन, हेल्थ जैसे इश्यूज के ऊपर काम किया। 2012 में लंदन चली गई। इसके बाद 2015 में इंडिया लौटी तो फिर से एक सोशल ऑर्गनाइजेशन के साथ जुड़ गई। करीब दो साल काम किया।
20760. At 79, Mumbai Woman Uses Secret Recipe to Start Chai Masala Business from Home
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- During the lockdown, 79-year-old Kokila Parekh started a chai masala business from Mumbai home to keep herself active.
- The masala powder recipe has been passed down by her ancestors and Mrs. Parekh has been making chai and milk with it for her family members for years now. When guests come home they are served her famous masala chai with some hot snacks.
- Initially, Mrs. Parekh would make a few extra kilos to distribute among these circles but, last month, she decided to start selling her chai masala powder across the country.